गान्धार्याश्व हृषीकेश विदुरस्थ च धीमत: । अन््येषां चैव सुद्ददां भीष्मादीनां हितैषिणाम्,“महाबाहु हृषीकेश! यह सत्पुरुषोंकी कही हुई बातें नहीं सुनता है। गान्धारी, बुद्धिमान् विदुर तथा हित चाहनेवाले भीष्म आदि अन्यान्य सुहृदोंकी भी बातें नहीं सुनता है
يا مهاباھو هريشيكيشا! إنه لا يسمع حتى كلام غاندھاري، ولا كلام فيدورا الحكيم، ولا كلام بهيشما وسائر الأصدقاء الناصحين الذين يلتمسون له الخير.
वैशम्पायन उवाच