Adharmic Victory as Unstable; Rules of Restraint, Mediation, and Conciliation (अधर्मविजय-अध्रुवत्व तथा क्षमा-नयः)
अमित्रोपग्रहं चास्य ते कुर्यु: क्षिप्रमापदि । संतुष्टा: सर्वतो राजन् राजव्यसनकाड्क्षिण:,राजन्! जब विजयी राजापर कोई विपत्ति आ जाती है, तब वे राजापर संकट पड़नेकी इच्छा रखनेवाले लोग विपक्षियोंद्वारा सब प्रकारसे संतुष्ट हो राजाके शत्रुओंका पक्ष ग्रहण कर लेते हैं
يا أيها الملك! إذا نزلت بالملك الظافر نازلة، فإنّ الذين يتمنّون وقوع الملك في الشدائد، وقد أرضاهم الخصوم من كل وجه، يسارعون إلى الانحياز إلى أعداء الملك.
भीष्म उवाच