राजधर्मः—प्रजापालनं दानयज्ञश्च
Royal Duty—Protection of Subjects, Generosity, and Sacrificial Discipline
सर्वाश्चैव प्रजा नित्यं राजा धर्मेण पालयन् । उत्थानेन प्रदानेन पूजयेच्चापि धार्मिकान्,समस्त प्रजाओंका सदा धर्मपूर्वक पालन करनेवाले राजाको घरपर आये हुए धर्मात्मा पुरुषोंका खड़ा होकर स्वागत करना चाहिये और उत्तम वस्तुएँ देकर उनका आदर-सत्कार करना चाहिये
والملكُ الذي يرعى جميعَ رعيّته على الدوام وفق الدارما، ينبغي له إذا قدم إلى داره رجالٌ أتقياء أن يقوم لاستقبالهم، وأن يكرمهم بإعطاء النفائس وحسن الضيافة.
भीष्म उवाच