Āśrama-dharma: Duties of the Four Life-Stages (आश्रमधर्मः)
दानमध्ययन यज्ञो राज्ञां क्षेमो विधीयते । तस्माद् राज्ञा विशेषेण योद्धव्यं धर्ममीप्सता,इस प्रकार युद्धको ही क्षत्रियोंके लिये प्रधान मार्ग बताया गया है, उसके लिये लुटेरोंके संहारसे बढ़कर दूसरा कोई श्रेष्ठतम कर्म नहीं है। यद्यपि दान, अध्ययन और यज्ञ--इनके अनुष्ठानसे भी राजाओंका कल्याण होता है, तथापि युद्ध उनके लिये सबसे बढ़कर है; अतः विशेषरूपसे धर्मकी इच्छा रखनेवाले राजाको सदा ही युद्धके लिये उद्यत रहना चाहिये
bhīṣma uvāca | dānam adhyayanaṁ yajño rājñāṁ kṣemo vidhīyate | tasmād rājñā viśeṣeṇa yoddhavyaṁ dharmam īpsatā |
قال بهيشما: إن الصدقة، ودراسة المعرفة المقدّسة، وإقامة القربان (اليَجْنَة) قد شُرِعت حقًّا أسبابًا لرفاه الملوك. غير أنّ الحاكم الذي يبتغي الدَّهَرْما، فإن القتال—فوق كل شيء—مطلوب منه على وجهٍ خاص؛ لذلك ينبغي للملك المريد للاستقامة أن يكون على أهبة الحرب دفاعًا عن النظام وحفظًا للسنن.
भीष्म उवाच