राजधर्मप्रश्नः — Yudhiṣṭhira’s Inquiry into Rājadharma (Śānti-parva 56)
निन्दन्ते स्वानधीकारान् संत्यजन्ते च भारत । न वृत्त्या परितुष्यन्ति राजदेयं हरन्ति च,भारत! उनके अधिकारमें जो काम सौंपा जाता है, उसको वे बुरा बताते और छोड़ देते हैं। उन्हें जो वेतन दिया जाता है, उससे वे संतुष्ट नहीं होते हैं और राजकीय धनको हड़पते रहते हैं
«يا بهاراتا، إنهم يذمّون ما أُسند إليهم من أعمال ثم يتركونها. لا يرضون بما يُعطَون من عطاء، ويستلبون مال الدولة ويغتصبونه.»
भीष्म उवाच