पुन: प्राप्तमिदं राज्यं पितृपैतामहं मया । नमस्ते पुण्डरीकाक्ष पुनः पुनररिंदम,'यदुसिंह श्रीकृष्ण! आपकी ही कृपा, नीति, बल, बुद्धि और पराक्रमसे मुझे पुनः अपने बाप-दादोंका यह राज्य प्राप्त हुआ है। शत्रुओंका दमन करनेवाले कमलनयन! आपको बारंबार नमस्कार है
«لقد استعدتُ هذا المُلك الموروث عن الآباء والأجداد. يا ذا العينين كاللوتس، يا قاهرَ الأعداء! لك أنحني مرارًا وتكرارًا».
वैशम्पायन उवाच