शान्ति पर्व (अध्याय 38): युधिष्ठिरस्य राजधर्म-जिज्ञासा तथा भीष्मोपसर्पण-प्रस्तावना | Shanti Parva Chapter 38: Yudhishthira’s Inquiry into Rajadharma and the Prelude to Approaching Bhishma
ततस्ते ब्राह्मणा: सर्वे स च राजा युधिष्ठिर: । व्रीडिता: परमोद्विग्नास्तृष्णीमासन् विशाम्पते,प्रजानाथ! इसके बाद वे सभी ब्राह्मण तथा राजा युधिष्ठिर अत्यन्त उद्विग्न और लज्जित हो गये। प्रतिवादके रूपमें उनके मुँहसे एक शब्द भी नहीं निकला। वे सभी कुछ देरतक चुप रहे
ثم إنّ جميعَ البراهمةِ والملكَ يودهيشثيرا استبدّ بهم الاضطرابُ والخجلُ؛ فظلّوا صامتين، ولم تخرج من أفواههم كلمةٌ واحدة جوابًا.
चारवक उवाच