तस्य चाहमसांनिध्ये श्रुतवानस्मि तं गतम् | स्वजनात् त॑ प्रतीक्षामि पर्जन्यमिव कर्षक:,उनके स्वजनोंसे मैंने सुना है कि वे यहाँसे दूर गये हुए हैं, अतः जैसे किसान वर्षाकी राह देखता है, उसी तरह मैं भी उनकी बाट जोहता हूँ
tasya cāham asānnidhye śrutavān asmi taṃ gatam | svajanāt taṃ pratīkṣāmi parjanyam iva karṣakaḥ |
«وفي غيبته سمعتُ من أهله أنه قد مضى بعيدًا عن هنا؛ لذلك أنتظر عودته كما ينتظر الفلّاح المطرَ المُحيي.»
ब्राह्मण उवाच