ब्राह्मण उवाच अनेन निनश्चयेनाहं साध्वि सम्प्राप्तवानिह । प्रतीक्षन्नागमं देवि वत्स्याम्यस्मिन् महावने,ब्राह्मणने कहा--सती-साध्वी देवि! मैं उनके दर्शन करनेका निश्चय करके ही यहाँ आया हूँ; अतः उनके आगमनकी प्रतीक्षा करता हुआ मैं इस महान् वनमें निवास करूँगा
قال البراهمن: «أيتها السيدة العفيفة، إنما جئتُ إلى هنا بعزمٍ قاطع على لقائه. لذلك سأقيم في هذه الغابة العظيمة، منتظرًا قدومه.»
ब्राह्मण उवाच