Atithi-satkāra and the Consolation of Wise Counsel (अतिथिसत्कारः प्रज्ञानवचनस्य च पराश्वासनम्)
धर्मयानं समारूढौ पर्वते गन्धमादने । तत्कालसमये चैव दक्षयज्ञो बभूव ह,पहले नर और नारायणने जब धर्ममय रथपर आरूढ़ हो गन्धमादन पर्वतपर अक्षय तप किया था, उसी समय प्रजापति दक्षका यज्ञ आरम्भ हुआ
في ذلك الحين ركب نارا ونارايَنة مركبةَ الدَّرْمَا، وأقاما تَقَشُّفًا لا يَبلى على جبل غندهمادَن؛ وفي الوقت نفسه بعينه ابتدأت يَجْنَةُ (الذبيحة الطقسية) لبراجابتي دَكْشا.
तामिन्द्र उवाच गच्छ नहुषस्त्वया वाच्योथ<पूर्वेण मामृषियुक्तेन यानेन त्वमधिरूढ