Atithi-prāpti and the Brāhmaṇa’s Deliberation on Triadic Dharma (अतिथिप्राप्तिः धर्मत्रयविचारश्च)
एष चैतत् परं ब्रह्म ज्ञेयो विज्ञानचक्षुषा । एवमेतत् पुरा दृष्टं मया वै ज्ञानचक्षुषा,ये ही परब्रह्म हैं। विज्ञानमय नेत्रसे ही इनका दर्शन एवं ज्ञान हो सकता है। पूर्वकालमें मैंने ज्ञानदृष्टिसे ही इनका इस प्रकार साक्षात्कार किया था
eṣa caitat paraṁ brahma jñeyo vijñānacakṣuṣā | evam etat purā dṛṣṭaṁ mayā vai jñānacakṣuṣā ||
قال فياسا: «إنّ هذا هو البراهمان الأسمى (البارابراهمان)، ولا يُعرَف إلا بعين التمييز الأعلى. وهكذا رُئي قديماً منّي أيضاً—بعين المعرفة».
व्यास उवाच