सर्वारम्भपरित्यागी निराशीरन्निष्परिग्रह: । येन सर्व परित्यक्त स विद्वान स च पण्डित:,जो कार्य आरम्भ करनेके सभी संकल्पोंको छोड़ चुका है, जिसके मनमें कोई कामना नहीं है, जो किसी वस्तुका संग्रह नहीं करता तथा जिसने सब कुछ त्याग दिया है, वही विद्वान है और वही पण्डित
من ترك كل عزمٍ على الشروع في الأعمال، ولا يحمل في قلبه رجاءً ولا شهوة، ولا يجمع متاعًا، وقد نبذ كل شيء—فهو العالم، وهو البنديت (الحكيم).
नारद उवाच