श्वः कार्यमद्य कुर्वीत पूर्वाह्न चापराह्निकम् । न हि प्रतीक्षते मृत्यु: कृतं वास्य न वाकृतम्,जो काम कल करना हो, उसे आज ही कर लेना चाहिये और जो दोपहर- बाद करना हो, उसे पहले ही पहरमें पूरा कर डालना चाहिये; क्योंकि मौत यह नहीं देखती कि इसका काम पूरा हुआ है या नहीं
قال فياسا: ما كان عملُه غدًا فليُنجَز اليوم، وما كان عملُه بعد الظهر فليُتمَّ في الصباح. فإن الموت لا ينتظر؛ لا ينظر أأُنجز العمل أم لم يُنجَز.
व्यास उवाच