शुकस्य मिथिलागमनम् (Śukasya Mithilāgamanam) — Śuka’s Journey to Mithilā and the Courtly Test
अहःक्षयमथो बुद्ध्वा निशि स्वप्नमनास्तथा | चोदयामास भगवानव्यक्तोडहंकृतं नरम्,भगवान् ब्रह्माजी जब देखते हैं कि मेरे दिनका अन्त हो गया, तब उनके मनमें रातको शयन करनेकी इच्छा होती है, इसलिये वे अहंकारके अभिमानी देवता रुद्रको संहारके लिये प्रेरित करते हैं
وحين يرى الإلهُ براهما أن «نهاري قد انقضى»، ينهض في نفسه ميلٌ إلى الرقاد ليلًا؛ فلذلك يُحرّض رودرا (Rudra)—الإلهَ المتلبّس بالأهَمْكارا (ahaṃkāra)—على إجراء السَّمْهارا، أي فعلِ الانحلال.
याज़्वल्क्य उवाच