अव्यक्त–प्रकृति–इन्द्रियविचारः
The Unmanifest, Prakṛtis, and the Sense-Complex
आस्तिक्यव्यवसायाभ्यामुपायाद् विस्मयाद् थधिया | समारभेदनिन्न्द्यात्मा न सो<र्थ: परिषीदति,जिसका हृदय उदार एवं प्रशस्त है, जो आस्तिक भाव, निश्चय एवं आवश्यक उपायसे गर्वहीनताके साथ उत्तम बुद्धिपूर्वक कार्य आरम्भ करता है, उसका वह कार्य कभी असफल नहीं होता है
من كان قلبه واسعًا كريمًا، ثابت الإيمان، راسخ العزم، عارفًا بالوسائل اللازمة، وشرع في العمل بعقل راجح من غير كِبْر—فإن عمله لا يبوء بالفشل قط.
पराशर उवाच