Adhyāya 284: Tapas as a Corrective to Household Attachment
Parāśara’s Instruction
दक्ष दक्ष न कर्तव्यो मन्युर्विघ्नमिमं प्रति । अहं यज्ञहरस्तुभ्यं दृष्टमेतत् पुरातनम्,“दक्ष! दक्ष! इस यज्ञमें जो विघ्न डाला गया है, इसके लिये तुम खेद न करना। मैंने पहले कल्पमें भी तुम्हारे यज्ञका विध्वंस किया था। यह घटना भी पूर्वकल्पके अनुसार ही हुई है
«يا دَكشا، يا دَكشا! لا تجعل الغضب يقوم فيك بسبب هذا العائق الذي وقع في القربان. أنا مُهلكُ يَجْنَاك؛ وقد شوهد هذا منذ القِدَم.»
भीष्म उवाच