अपि हाक्तानि धर्म्याणि व्यवस्यन्त्युत्तरावरे । लोकयात्रार्थमेवेह धर्मस्य नियम: कृत:,शास्त्रोंमें जो धर्मानुकूल कार्य बताये गये हैं, उन्हें ही प्रधान एवं अप्रधान सभी लोग निश्चित रूपसे धर्म मानते हैं। लोकयात्राका निर्वाह करनेके लिये ही महर्षियोंने यहाँ धर्मकी मर्यादा स्थापित की है
حتى الأعمال التي تُبيّنها الشاسترا (الكتب المعيارية) على أنها موافقة للدارما، فإن الناس جميعًا—رفيعهم ووضيعهم، كبيرهم وصغيرهم—يحكمون عليها يقينًا بأنها دارما. وإنما أقام الحكماء العظام (الرِّشي) هنا حدود الدارما ونظامها لكي تستقيم مسيرة الحياة في هذا العالم.
भीष्म उवाच