ब्राह्मणस्य पूर्वतरा वृत्तिः — The Earlier Ideal Conduct of a Brahmana
River-of-Saṃsāra Metaphor
न हि त्वां नोत्सहे हन्तुं सवज़मपि मुष्टिना । न तु विक्रमकालो<यं क्षमाकालोडयमागत:,तुम्हारे हाथमें वज् रहनेपर भी मैं केवल मुक्केसे मारकर तुम्हें यमलोक न पहुँचा सककूँ, ऐसी बात नहीं है। किंतु मेरे लिये यह पराक्रम दिखानेका नहीं, क्षमा करनेका समय आया है
na hi tvāṁ notsahe hantuṁ sarvajam api muṣṭinā | na tu vikrama-kālo ’yaṁ kṣamā-kālo ’yam āgataḥ ||
قال بهيشما: «ليس لأنني أعجز عن صرعك—حتى بقبضةٍ عارية، وإن كنتَ تمسك بالصاعقة (فَجْرَة/فَجْرَا: vajra). ولكن هذه ليست ساعة إظهار البأس؛ فقد جاءني الآن وقت الاحتمال والصفح.»
भीष्म उवाच