Adhyāya 222 — ब्रह्मस्थानप्राप्ति: मोक्षधर्मे समत्वव्रतम्
Attaining the Brahman-Station: The Vow of Equanimity in Mokṣadharma
यदि स्यात् पुरुष: कर्ता शक्रात्मश्रेयसे ध्रुवम् | आरम्भास्तस्य सिद्धयेयुर्न तु जातु परा भवेत्,इन्द्र! यदि पुरुष ही कर्ता होता तो वह अपने कल्याणके लिये जो कुछ भी करता, उसके भी सारे कार्य अवश्य सिद्ध होते। उसे अपने प्रयत्नमें कभी पराभव नहीं प्राप्त होता
قال برهلادا: «يا إندرا! لو كان الإنسان هو الفاعل حقًّا، لتمّت يقينًا كلُّ المبادرات التي يشرع فيها لخير نفسه، ولما ناله قطُّ إخفاقٌ في سعيه.»
प्रह्माद उवाच