बलीन्द्रसंवादः — Kāla, Anityatā, and the Limits of Agency
Mahābhārata 12.217
एतावदेतद् विज्ञानमेतदस्ति च नास्ति च । तृष्णाबद्धं जगत् सर्व चक्रवत् परिवर्तते,इतना ही यह विज्ञान है-यह जगत् है भी और नहीं भी है (अर्थात् व्यावहारिक अवस्थामें यह जगत् है और पारमार्थिक अवस्थामें नहीं है)। सम्पूर्ण जगत तृष्णामें बँधकर चक्रके समान घूम रहा है
هذا هو مبلغ المعرفة: هذا العالم كائنٌ وغير كائن. (في مرتبة التعامل والظاهر هو موجود، وفي الحقيقة العليا ليس بموجود.) إن العالم بأسره مقيّد بالعطش والرغبة، يدور كالعجلة.
भीष्म उवाच