Adhyāya 199: Karma–Jñāna Causality and the Nirguṇa Brahman
Manu’s Instruction
ब्राह्मण उवाच तुष्यसि त्वं स्वधर्मेण तथा तुष्टा वयं नूप । अन्योन्यस्यान्तरं नास्ति यदिष्ट॑ तत् समाचर,ब्राह्मणने कहा--नरेश्वर! जैसे आप अपने धर्मसे संतुष्ट हैं, उसी तरह हम भी अपने धर्मसे संतुष्ट हैं। हम दोनोंमें कोई अन्तर नहीं है। अतः आपको जो अच्छा लगे, वह कीजिये
قال البراهمي: «يا ملكَ الناس، كما أنك راضٍ بدَرْمَك (dharma) كذلك نحن راضون بدَرْمَنا. لا فرق بيننا. فافعل ما تراه حسنًا.»
ब्राह्मण उवाच