मृत्यु-काल-प्रबोधनम् (Instruction on Mortality, Time, and Truth) — Mahābhārata, Śānti-parva 169
कीदृशा मानवा: सौम्या: कै: प्रीति: परमा भवेत् । आयत्यां च तदात्वे च के क्षमास्तान् वदस्व मे,सौम्य स्वभावके मनुष्य कैसे होते हैं? किनके साथ प्रेम करना उत्तम होता है? वर्तमान और भविष्यमें कौन-से मनुष्य उपकार करनेमें समर्थ होते हैं? उन सबका मुझसे वर्णन कीजिये
«كيف يكون الناسُ الودعاءُ الطيّبو الطبع؟ ومع مَن تكون المودّةُ أسمى؟ وفي الحاضر والمستقبل، أيُّ الرجال يقدرون على الإحسان والمعونة؟ فصِفْهم لي جميعًا.»
युधिछिर उवाच