बक-गौतमाख्यानम् / The Baka–Gautama Account
On Gratitude and Friendship Ethics
ताभ्यो विश्वानि भूतानि देवा: पितृगणास्तथा । गन्धर्वाप्सरसश्ैव रक्षांसि विविधानि च,उन्हीं कन््याओंसे समस्त प्राणी, देवता, पितर, गन्धर्व, अप्सरा, नाना प्रकारके राक्षस, पशु, पक्षी, मत्स्य, वानर, बड़े-बड़े नाग, जल और स्थलमें विचरनेवाले सब प्रकारके पक्षिगण, उद्भिज्ज, स्वेदज, अण्डज और जरायुज प्राणी उत्पन्न हुए। तात! इस प्रकार सम्पूर्ण स्थावर-जड़म जगत् उत्पन्न हुआ
tābhyo viśvāni bhūtāni devāḥ pitṛgaṇās tathā | gandharvāpsarasaś caiva rakṣāṃsi vividhāni ca ||
قال بهيشما: «من أولئك العذارى وُلدت جميع الكائنات في الكون—وكذلك الآلهة وجماعات الـPitṛ (أرواح الأسلاف)، ومعهم الغندرفا والأبساراس، وأنواع شتّى من الراکشاسا».
भीष्म उवाच