Adhyāya 164: Gautama as Guest; Kaśyapa’s Satkāra and the Fourfold Arthagati; Journey to Virūpākṣa
विरुद्धानीह शास्त्राणि ये पश्यन्ति कुरूद्वह । विधित्सा जायते तेषां तत्त्वज्ञानान्निवर्तते,कुरुश्रेष्ठ! जो लोग धर्मके विरोधी शास्त्रोंका अवलोकन करते हैं, उनके मनमें अनुचित कर्म करनेकी इच्छारूप विधित्सा उत्पन्न होती है। यह तत्त्वज्ञानसे निवृत्त होती है
يا أكرمَ الكُرُو! إنّ الذين ينظرون في الشاسترا المخالِفة للدارما تنشأ في قلوبهم «ڤِدْهِتْسَا»؛ أي رغبةُ الإقدام على فعلٍ غير لائق. غير أنّها تنكفئ وتزول بمعرفة الحقيقة (تَتْتْڤا-جْنَانا).
भीष्म उवाच