त्रिवर्गविचारः
Tri-varga Deliberation: Dharma, Artha, Kāma
भारत! धर्मका यह मार्ग बहुत बड़ा है। इससे बहुत सी शाखाएँ निकली हुई हैं। इन धर्मोमेंसे कौनसा धर्म सर्वोत्तम, अवश्य पालन करनेयोग्य माना गया है? ।। धर्मस्य महतो राजन् बहुशाखस्य तत्त्वतः । यन्मूलं परमं तात तत् सर्व ब्रूहूशेषत:,राजन! बहुत-सी शाखाओंसे युक्त इस महान् धर्मका वास्तवमें परम मूल क्या है? तात! ये सब बातें मुझे पूर्णरूपसे बताइये
dharmasya mahato rājan bahuśākhasya tattvataḥ | yanmūlaṃ paramaṃ tāta tat sarvaṃ brūhi aśeṣataḥ ||
وسأل يودهيشثيرا: «أيها الملك، إن هذا الطريق العظيم للدارما كثيرُ الفروع. فما أصلُه الأعلى حقًّا، وما أساسُه الأسمى؟ يا عزيزَ النفس، أخبرني بكل ذلك تامًّا غير منقوص، ولا تترك شيئًا.»
युधिछिर उवाच