त्रिवर्गविचारः
Tri-varga Deliberation: Dharma, Artha, Kāma
सर्वग्राम्यास्तथा53रण्या याश्न लोके प्रवृत्तय: । निन्दां चैव प्रशंसां च यो नाश्रयति मुच्यते,जगतमें ग्रामीणों और वनवासियोंकी जो-जो प्रवृत्तियाँ होती हैं, उन सबका जो सेवन नहीं करता तथा दूसरोंकी निन््दा और प्रशंसासे भी दूर रहता है, उसकी मुक्ति हो जाती है
وما يجري في العالم من نزعاتٍ وعاداتٍ عند أهل القرى وأهل البراري جميعًا—من لا يتعاطاها، ولا يتكئ كذلك على ذمّ الناس ولا على مدحهم—فإنه ينال الخلاص.
भीष्म उवाच