अज्ञान–लोभयोः परस्परहेतुत्वम्
Mutual Causality of Ignorance and Greed
कल्याणमनुकर्तव्यं पुरुषेण बुभूषता । ये सुगन्धीनि सेवन्ते तथागन्धा भवन्ति ते,सुखकी अभिलाषा रखनेवाले पुरुषको कल्याणकारी कर्मोंका अनुष्ठान करना चाहिये। जो सुगन्धित पदार्थोंका सेवन करते हैं, उनके शरीरसे सुगन्ध निकलती है और जो सदा दुर्गन्धका सेवन करते हैं, वे अपने शरीरसे दुर्गन्न्ध ही फैलाते हैं। जो मनुष्य तपस्यामें तत्पर होता है, वह तत्काल सारे पापोंसे मुक्ता हो जाता है
kalyāṇam anukartavyaṃ puruṣeṇa bubhūṣatā | ye sugandhīni sevante tathāgandhā bhavanti te ||
قال شاونَكا: من يبتغي العافية الحقة فليُقم بالأعمال المباركة النافعة. فالذين يخالطون الطيب يصيرون طيّبي الرائحة، وكذلك من يلازم الخبيث العفن يحمل عفنه وينشره. وفي ذلك بيانٌ لناموس الصحبة: بمرافقة الأخيار وتربية السلوك السليم يتهذّب الطبع، وبالتعلّق بالنجس تنحطّ الطبيعة.
शौनक उवाच