Ānṛśaṃsya, Amātya-Guṇa, and Reconciliatory Counsel (आनृशंस्य–अमात्यगुण–संधि-उपदेशः)
उभयोरेव वामर्थे यतिष्ये तव तस्य च । संश्लेषं वा करिष्यामि शाश्वतं हनपायिनम्,मैं तुम्हारे और राजा जनक-दोनोंके ही हितके लिये अब स्वयं ही प्रयत्न करूँगा और तुम दोनोंमें ऐसा घनिष्ठ सम्बन्ध स्थापित करा दूँगा, जो अमिट और चिरस्थायी हो
سأسعى بنفسي لما فيه مصلحتك ومصلحة الملك جَنَكَ كليكما. وسأقيم بينكما رباطًا وثيقًا خالدًا لا يزول ولا ينحلّ على مرّ الدهور.
भीष्म उवाच