Jaitrya-nimitta: Signs of Prospective Victory and the Priority of Conciliation (जयलक्षण-निमित्त तथा सान्त्व-प्रधान नीति)
परस्परज्ञा: संहृष्टास्त्यक्तप्राणा: सुनिश्चिता: । अपि पज्चाशतं शूरा निध्नन्ति परवाहिनीम्,एक-दूसरेको जाननेवाले, हर्ष और उत्साहसे परिपूर्ण, प्राणोंका मोह छोड़ देनेवाले तथा मरने-मारनेके दृढ़ निश्चयसे युक्त पचास शूरवीर भी सारी शत्रु-सेनाका संहार कर सकते हैं
«حتى خمسون فارسًا—يعرف بعضهم بعضًا، ممتلئين فرحًا وحماسة، قد طرحوا التعلّق بالحياة، وعزموا عزمًا لا يتزعزع على القتل أو الموت—يستطيعون أن يُفْنوا جيش العدو بأسره.»
भीष्म उवाच