ऋषिसमागमः — युधिष्ठिरस्य शोकवर्णनम्
Sage Assembly and Yudhiṣṭhira’s Articulation of Grief
अथ शूरो महेष्वास: पार्थेनाजी निपातित: । अहं त्वज्ञासिषं पश्चात् स्वसोदर्य द्विजोत्तम,द्विजश्रेष्ठ। तदनन्तर युद्धस्थलमें महाधनुर्धर शूरवीर कर्ण अर्जुनके हाथसे मारे गये। प्रभो! मुझे तो माता कुन्तीके ही कहनेसे बहुत पीछे यह बात मालूम हुई है कि “कर्ण हमारे ज्येष्ठ एवं सहोदर भाई थे।'” मैंने भाई की हत्या करायी है; इसलिये मेरे हृदयको तीव्र वेदना हो रही है
atha śūro maheṣvāsaḥ pārthenājau nipātitaḥ | ahaṁ tv ajñāsiṣaṁ paścāt svasodarya dvijottama ||
قال يودهيشثيرا: «ثم في ساحة القتال سقط ذلك البطل، الرامي العظيم، صريعًا بيد بارثا (أرجونا). غير أنّي لم أعلم إلا بعد ذلك—يا أفضلَ أهل الدِّوِجَة—أنه كان أخي الشقيق. وحين سمعت من أمي كونتي، بعد زمن طويل من وقوع الأمر، قولها: “كارنا هو أكبرُنا، مولودٌ من الأم نفسها”، استولى على قلبي وجعٌ لاذع، لأني كنت سببًا في قتل أخي.»
युधिछिर उवाच