Śalya Installed as Commander; Coalition Agreement and Battle Arrays (शल्यसेनापत्यारोहणं व्यूहवर्णनं च)
संजय उवाच अभिषिक्ते तथा शल्ये तव सैन्येषु मानद । न कर्णव्यसनं किंचिन्मेनिरे तत्र भारत,इति सत्य ब्रवीम्येष दुर्योधन न संशय: । “मैं रणभूमिमें कुन्तीके सभी पुत्रों और सामने आये हुए सोमकोंपर भी विजय प्राप्त कर लूँगा। इसमें भी संदेह नहीं कि मैं तुम्हारा सेनापति होऊँगा और ऐसे व्यूहका निर्माण करूँगा, जिसे शत्रु लाँघ नहीं सकेंगे। दुर्योधन! यह मैं तुमसे सच्ची बात कहता हूँ। इसमें कोई संशय नहीं है” संजय कहते हैं--मानद! भरतनन्दन! इस प्रकार आपकी सेनाओंमें राजा शल्यका अभिषेक होनेपर समस्त योद्धाओंको कर्णके मारे जानेका थोड़ा-सा भी दुःख नहीं रह गया
sañjaya uvāca | abhiṣikte tathā śalye tava sainyeṣu mānada | na karṇavyasanaṃ kiñcin menire tatra bhārata | iti satyaṃ bravīmy eṣa duryodhana na saṃśayaḥ ||
قال سنجيا: «يا واهب الشرف، يا سليل بهاراتا! لما مُسِحَ شاليا على الوجه اللائق (قائدًا) في جموعك، لم يشعر المحاربون هناك بأدنى حزن على مصيبة كارنا (موته).»
संजय उवाच