द्वैपायनह्रदे दुर्योधनान्वेषणम् / The Search for Duryodhana at Dvaipāyana Lake
तथा दृष्टवा महाराज एक: स पृथिवीपति: । हतं स्वहयमुत्सृज्य प्राड्मुख: प्राद्रवद् भयात्,महाराज! रथियोंमें श्रेष्ठ दुर्योधनने जब समरभूमिमें अपने किसी सहायकको न देखकर शत्रुओंको गर्जते देखा और अपनी सेनाके विनाशपर दृष्टिपात किया, तब वह अकेला भूपाल अपने मरे हुए घोड़ेको वहीं छोड़कर भयके मारे पूर्व दिशाकी ओर भाग चला
tathā dṛṣṭvā mahārāja ekaḥ sa pṛthivīpatiḥ | hataṃ svahayam utsṛjya prāṅmukhaḥ prādravad bhayāt ||
قال سنجيا: لما رأى ذلك، أيها الملك العظيم، ذلك الملك—وقد تُرك وحيدًا—ترك فرسه الذي قُتل، ثم ولّى وجهه شطر المشرق وفرّ مذعورًا.
संजय उवाच