Book 10, Adhyāya 12: Aśvatthāmā’s Request for the Cakra and the Brahmaśiras Context
उद्यन्तुं वा चालयितु द्रौणि: परमदुर्मना: । कृत्वा यत्नं परिश्रान्त: स न्यवर्तत भारत,'सारा प्रयत्त और सारी शक्ति लगाकर भी जब उसे पकड़कर उठा अथवा हिला न सका, तब द्रोणकुमार मन-ही-मन बहुत दुःखी हो गया। भारत! यत्न करके थक जानेपर वह उसे लेनेकी चेष्टासे निवृत्त हो गया
وكان دْرَوṇي شديد الكآبة، يحاول أن يرفعه أو يزحزحه؛ فلما أضناه السعي وتعب، يا بهاراتا، ارتدَّ راجعًا.
वैशम्पायन उवाच