सृष्टप्राणो भृशतरं तेन चेत् संगमो मम । किमन्यद् दुःखमधिकं परमं भुवि कौरवा:,शत्रुवीरोंका संहार करनेवाला ट्रुपदकुमार धृष्टद्युम्न पाण्डवोंके पक्षका पोषक हो गया है। रथियों और अतिरथियोंकी गणनामें जिसका नाम सबसे पहले लिया जाता है, वह तरुण वीर अर्जुन धृष्टद्युम्नके लिये, यदि मेरे साथ उसका युद्ध हुआ तो, लड़कर प्राणतक देनेके लिये उद्यत हो जायगा। कौरवो! (अर्जुनके साथ मुझे लड़ना पड़े) इस पृथ्वीपर इससे बढ़कर महान् दुःख मेरे लिये और क्या हो सकता है?
sṛṣṭaprāṇo bhṛśataraṃ tena cet saṅgamo mama | kim anyad duḥkham adhikaṃ paramaṃ bhuvi kauravāḥ ||
قال فايشَمبايانا: «إن وقع بيني وبينه صدامٌ، لقاتل بأقصى شراسة، مستعدًّا لأن يراهن حتى بحياته. يا كوروڤا، أيُّ حزنٍ أعظم وأشدُّ احتمالًا على هذه الأرض من أن أُكره على معركة كهذه؟»
वैशम्पायन उवाच