अक्षदेवन-प्रवर्तनम् | Commencement of the Dice Game
विसंज्ञान् भूमिपान् दृष्टवा मां च ते प्राहसंस्तदा । ततः प्रह्ृष्टो बीभत्सु: प्रादाद्धेमविषाणिनाम्,वे मुझे तथा अन्य राजाओंको अचेत हुए देखकर उस समय जोर-जोरसे हँस रहे थे। भारत! तदनन्तर अर्जुनने प्रसन्न होकर पाँच सौ बैलोंको, जिनके सींगोंमें सोना मँढ़ा हुआ था, मुख्य-मुख्य ब्राह्मणोंमें बाँ- दिया। पिताजी! न रन्तिदेव, न नाभाग, न मान्धाता, न मनु, न वेननन्दन राजा पृथु, न भगीरथ, न ययाति और न नहुष ही वैसे ऐश्वर्यसम्पन्न सम्राट थे, जैसे कि आज राजा युधिष्छिर हैं
visaṁjñān bhūmipān dṛṣṭvā māṁ ca te prāhasaṁs tadā | tataḥ prahṛṣṭo bībhatsuḥ prādād hemaviṣāṇinām ||
قال دوريودانا: «لمّا رأوني ورأوا أولئك الملوك مطروحين على الأرض بلا وعي، ضحكوا بصوتٍ عالٍ في ذلك الحين. ثم إنّ أرجونا—المُلقّب ببيبهاتسو—وقد سُرَّ بالمشهد، وزّع على كبار البراهمة خمسَمئةِ ثورٍ قُدِّمت قرونُها بصفائح من ذهب».
दुर्योधन उवाच