Rājasūyābhiṣeka-darśana: Duryodhana’s Observation of the Consecration
वैशम्पायन उवाच आर्तवाक्यं तु तत् तस्य प्रणयोक्त निशम्य सः । धृतराष्ट्रोडब्रवीत् प्रेष्पान् दुर्योधनमते स्थित:,वैशम्पायनजी कहते हैं--जनमेजय! अपने पुत्रका यह प्रेमपूर्ण आर्त वचन सुनकर राजा धृतराष्ट्र दुर्योधनके मतमें आ गये और सेवकोंसे इस प्रकार बोले--
قال فَيْشَمْبايَنَة: «يا جاناميجايا، لما سمع الملك دِهْرِتَراشْتْرَة كلام ابنه الموجِعَ المفعمَ بالمودّة، مال إلى رأي دوريوذانا، ثم قال للخَدَم على هذا النحو—»
वैशम्पायन उवाच