Adhyāya 32: Rājasūya-Dīkṣā and Appointment of Court Offices (राजसूयदीक्षा तथा अधिकारविनियोगः)
तान् सर्वान् स वशे चक्रे शासनादेव पाण्डव: । तत्रस्थ: प्रेषयामास वासुदेवाय भारत,रामठ, हार, हूण तथा अन्य जो पश्चिमी नरेश थे, उन सबको पाण्डुकुमार नकुलने आज्ञामात्रसे ही अपने अधीन कर लिया। भारत! वहीं रहकर उन्होंने वसुदेवनन्दन भगवान् श्रीकृष्णके पास दूत भेजा
فأخضع الباندافي أولئك جميعًا بأمره وحده. ومن هناك—يا بهاراتا—أرسل رسولًا إلى فاسوديفا (السيد شري كريشنا).
वैशम्पायन उवाच