Kṛṣṇasya Khāṇḍavaprasthāt Dvārakā-prayāṇaḥ | Krishna’s Departure for Dvārakā
वैशम्पायन उवाच निवृत्य धर्मराजस्तु सह भ्रातृभिरच्युत: । सुहृत्परिवृतो राजा प्रविवेश पुरोत्तमम्,वैशम्पायनजी कहते हैं--जनमेजय! अपनी मर्यादासे च्युत न होनेवाले धर्मराज युधिष्ठिर भाइयों-सहित मार्गसे लौटकर सुहृदोंके साथ अपने श्रेष्ठ नगरके भीतर प्रविष्ट हुए
قال فايشَمبايانا: إنّ دارماراجا يودهيشثيرا—الملك الذي لا يزيغ عن الدارما—عاد مع إخوته، محاطًا بأصدقائه، ودخل مدينته الفاضلة.
वैशम्पायन उवाच