Jarāsandha as Obstacle to the Rājasūya — Kṛṣṇa’s Strategic Genealogical Brief
Sabhā Parva, Adhyāya 13
प्रियमेव परीप्सन्ते केचिदात्मनि यद्धितम् । एवम्प्रायाश्व दृश्यन्ते जनवादा: प्रयोजने,कुछ लोग जो अपने लिये हितकर है, उसीको मेरे लिये भी प्रिय एवं हितकर समझ बैठते हैं। इस प्रकार अपने-अपने प्रयोजनको लेकर प्राय: लोगोंकी भिन्न-भिन्न बातें देखी जाती हैं
«إنّ بعضهم لا يبتغي إلا ما يراه نافعًا لنفسه، ثم يظنّ أنّه سيكون لي أيضًا محبوبًا ونافعًا. وهكذا، تبعًا لمقاصد الناس ومصالحهم، تُرى أقوالهم في الغالب مختلفة متباينة.»
युधिछिर उवाच