यदि स्वयं वज्रधरोडस्य गोप्ता तथापि याता पितृराजवेश्मनि । युद्धस्थलमें उस नागके ऐसा कहनेपर सूतपुत्र कर्णने उससे पूछा--“पहले यह तो बताओ कि ऐसा भयानक रूप धारण करनेवाले तुम हो कौन?” तब नागने कहा--'अर्जुनने मेरा अपराध किया है। मेरी माताका उनके द्वारा वध होनेके कारण मेरा उनसे वैर हो गया है। तुम मुझे नाग समझो। यदि साक्षात् वज्रधारी इन्द्र भी अर्जुनकी रक्षाके लिये आ जायाँ तो भी आज अर्जुनको यमलोकमें जाना ही पड़ेगा"
yadi svayaṁ vajradharo ’sya goptā tathāpi yātā pitṛrāja-veśmani |
قال سانجيا: «حتى لو جاء إندرا نفسه، حامل الصاعقة، ليحمي أرجونا بشخصه، فإن أرجونا لا بدّ أن يمضي اليوم إلى دار يَما، سيد الآباء.» تُصوِّر هذه العبارة نذرَ الناغا للثأر بوصفه قَدَرًا لا يُردّ: عداوةٌ شخصية وُلِدت من مظلمةٍ مُتوهَّمة تُحمَل إلى ساحة القتال كدعوى أخلاقية للقصاص، مهما كان التدخّل الإلهي.
संजय उवाच