न चेदद्य हि त॑ वीरं निहनिष्यसि संयुगे । प्राणानेव परित्यक्ष्ये जीवितार्थो हि को मम,“यदि आज युद्धस्थलमें तुम वीर कर्णका वध नहीं करोगे तो मैं अपने प्राणोंका ही परित्याग कर दूँगा। फिर मेरे जीवनका प्रयोजन ही क्या है?”
na ced adya hi taṁ vīraṁ nihaniṣyasi saṁyuge | prāṇān eva parityakṣye jīvitārtho hi ko mama ||
قال سنجيا: «إن لم تقتل اليوم في ساحة القتال ذلك البطلَ كارنا، فسأطرح أنفاسي طرحًا وأهجر الحياة. فأيُّ غايةٍ تبقى لعمري بعد ذلك؟»
संजय उवाच