कर्णवधोत्तरं शल्य-दुर्योधनसंवादः
Aftermath of Karṇa’s Fall: Śalya’s Address to Duryodhana
अप्याशिष्म वयमर्जुन त्वयि यियासवो बहु कल्याणमिष्टम् । तन्न: सर्व विफल राजपुत्र फलार्थिनां विफल इवातिपुष्प:,“राजकुमार अर्जुन! हमने बहुत-से मंगलमय अभीष्ट पदार्थ प्राप्त करनेकी इच्छा रखकर तुमपर आशा लगा रखी थी; परंतु फल चाहनेवाले मनुष्योंको अधिक फूलोंवाला फलहीन वृक्ष जैसे निराश कर देता है, उसी प्रकार तुमसे हमारी सारी आशा निष्फल हो गयी
sañjaya uvāca |
apy āśiṣma vayam arjuna tvayi yiyāsavo bahu kalyāṇam iṣṭam |
tan naḥ sarvaṁ viphalam rājaputra phalārthināṁ viphalam ivātipuṣpaḥ ||
قال سانجيا: «يا أرجونا ابنَ الملك، لقد علّقنا آمالنا عليك، نتطلع إلى نيل ثمراتٍ كثيرة مباركة ومشتهى. لكن آمالنا كلها غدت اليوم عقيمة—كشجرةٍ تفيض بالأزهار ولا تُثمر، فتُخَيِّبُ من يطلب الثمر.»
संजय उवाच