अर्जुनकर्णसंनिपातवर्णनम् / The Convergence of Arjuna and Karṇa
तेन केतुश्न मे छिन्नो हतौ च पार्ष्णिसारथी । हतवाहस्ततश्चास्मि युयुधानस्य पश्यत:,उसने सात्यकि, धृष्टद्युम्न, नकुल, सहदेव, वीर शिखण्डी, द्रौपदीपुत्र तथा पांचालोंके देखते-देखते मेरी ध्वजा काट डाली, पार्श्वरक्षकोंको मार डाला और मेरे घोड़ोंका भी संहार कर डाला था
حينئذٍ قُطِعَ لوائي، وقُتِلَ حُرّاسي على الجانبين، وأُبيدت خيولي—وكلُّ ذلك على مرأى من يُيُوذَانَة (سَاتْيَكِي)، ودهِرِشْتَديُومْنَة، ونَكُولا، وسَهَدِيفَة، والبطل شِخَنْدِين، وأبناء دْرَوْبَدِي، وجميع البَانْچَالَة.
युधिषछ्िर उवाच