अर्जुनकर्णयोर्युद्धवर्णनम्
Description of the Arjuna–Karṇa Engagement and Counsel to Duryodhana
ततस्तु गत्वा पुरुषप्रवीरी राजानमासाद्य शयानमेकम् । रथादुभौ प्रत्यवरुह्मु तस्माद् ववन्दतुर्धर्मराजस्य पादौ,राजेन्द्र! शत्रुओंका सामना करनेके लिये शत्रुदमन वृकोदर भीमसेनको स्थापित करके और युद्धके विषयमें उन्हें पूर्वोक्त संदेश देकर वे दोनों पुरुषशिरोमणि अकेले सोये हुए राजा युधिष्ठिके पास जा रथसे नीचे उतरे और उन्होंने धर्मराजके चरणोंमें प्रणाम किया
tatastu gatvā puruṣapravīrī rājānam āsādya śayānam ekam | rathād ubhau pratyavaruhmu tasmād vavandatur dharmarājasya pādau ||
ثم مضى ذانك الرجلان من خيرة الرجال حتى بلغا الملك وهو مضطجعٌ وحده، فنزلا كلاهما عن العربة. وانحنيا عند قدمي دهرماراجا (يودهيشثيرا)، مُقِرَّين بسلطانه الأخلاقي حتى تحت وطأة الحرب.
संजय उवाच