Mahabharata Adhyaya 30
Karna ParvaAdhyaya 3081 Versesकौरव पक्ष भीतर से असुरक्षित, पर शल्य-सारथ्य की योजना से अस्थायी आशा; पाण्डव पक्ष की नैतिक/दैवी बढ़त (कृष्ण-रक्षण) का स्वीकार।

Adhyaya 30

Karna Reproves Shalya; Brahmin Reports on Bāhlīkas; Shalya’s Universalizing Rebuttal (कर्ण–शल्य संवादः)

Upa-parva: Karṇa–Śalya Saṃvāda (Counsel-and-Provocation Episode)

Saṃjaya reports that Karṇa addresses Śalya, rejecting intimidation by mere speech and asserting fearlessness even against divine opposition. Karṇa then recounts what he claims to have heard in Dhṛtarāṣṭra’s presence: Brahmins narrating earlier accounts that disparage Bāhlīka/Āraṭṭa regions through lists of places, practices, and transgressive behaviors, including ritual impurity, intemperance, and social disorder. The discourse expands into a theory of kingship: the ruler is described as bearing a ‘sixth share’ of the subjects’ merit and demerit, implying governance as moral participation. Further embedded sayings attribute directional guardianship to deities and enumerate regional characterizations. Karṇa concludes by urging Śalya to remain silent and not act antagonistically, threatening to eliminate Śalya first before engaging Keśava and Arjuna. Śalya replies by pointing to faults within Karṇa’s own domain, emphasizing that virtue and vice exist everywhere, and that people are adept at criticizing others while missing self-critique. Saṃjaya closes: Karṇa offers no further answer; the exchange ends with renewed prompting to proceed.

Chapter Arc: रात्रि के आवरण में कौरव-शिविर की मंत्रणा—दिन के अपमान और क्षति के बाद दुर्योधन के मन में एक ही प्रश्न धधकता है: अर्जुन के रथ को कृष्ण स्वयं बचाते हैं, फिर उसे कैसे जीता जाए? → सभा में अर्जुन की अद्वितीय वीर-गाथाएँ गिनाई जाती हैं—सुभद्रा-हरण, खाण्डव-दहन, निवातकवच-वध, किरातरूपधारी शंकर से युद्ध—मानो यह सिद्ध करने को कि अर्जुन साधारण मनुष्य नहीं। इसी के साथ दुर्योधन की व्यथा और तीखी होती है: ‘कृष्ण रक्षक हैं; मैं उन दिव्य सहायकों के बिना कैसे लड़ूँ?’ तब शल्य के अश्व-ज्ञान और सारथ्य की चर्चा उठती है—कर्ण के लिए एक निर्णायक व्यवस्था का प्रस्ताव। → कर्ण का प्रतिज्ञा-स्वर—शल्य को सारथि बनाकर वह युद्धभूमि में अपना पराक्रम दिखाने और पाण्डवों को समर में पराजित करने की घोषणा करता है; वह दुर्योधन से आग्रह करता है कि समय निकलने से पहले यह व्यवस्था तुरंत कर दी जाए। → धृतराष्ट्र दैव की प्रबलता का प्रतिपादन करते हैं—मानो सब कुछ भाग्य-चक्र में बँधा हो। संजय प्रत्युत्तर में दोषारोप/कटु सत्य कहकर संकेत देते हैं कि केवल दैव नहीं, नीति-भ्रंश और दुर्योधन की हठ भी विनाश का कारण है। रात्रि की योजना शल्य-सारथ्य की ओर मुड़कर स्थिर होती है। → ‘क्रियतामेष कामो मे…’—कर्ण की उतावली के साथ अध्याय अगले दिन के निर्णायक संग्राम की दहलीज़ पर छोड़ देता है: क्या शल्य का सारथ्य सचमुच अर्जुन-कृष्ण के रथ-बल को काट पाएगा?

Shlokas

Verse 1

अपन का बा | ऑफ क्राछ एकत्रिशो< ध्याय: रात्रिमें कौरवोंकी मन्त्रणा

قال دِهْرِتَرَاشْتْرَا: «يا سَنْجَيَا، لقد اتّضح أن أَرْجُونَ، بإرادته الخالصة، قد قتل جميع رجالنا. وفي ساحة القتال، متى ما رفع سلاحه، فلن ينجو حيًّا من يديه حتى الموتُ نفسه—وإن كان معتديًا لا يرحم».

Verse 2

पार्थश्लैको5हरद्‌ भद्रामेक श्चाग्निमतर्पयत्‌ । एकश्नेमां महीं जित्वा चक्रे बलिभूतो नूपान्‌

قال دِهْرِتَرَاشْتْرَا: «أَرْجُونَ وحده اختطف سُبْهَدْرَا النبيلة؛ وهو وحده أرضى أَغْنِي في غابة خَانْدَفَا؛ وهو وحده، بعد أن قهر هذه الأرض، جعل الملوك يؤدّون الجزية.»

Verse 3

एको निवातकवचानहनद्‌ दिव्यकार्मुक: । एक: किरातरूपेण स्थितं शर्वमयोधयत्‌

قال دِهْرِتَرَاشْتْرَا: «وحده، وهو يحمل قوسًا سماويًّا، قتل النِّيفاتاكافَتشا؛ ووحده، متقمّصًا هيئة كِيرَاتَا، قاتل حتى شَرْفَا (شِيفَا) الذي وقف أمامه.»

Verse 4

एको ह्ा[रक्षद्‌ भरतानेको भवमतोषयत्‌ | तेनैकेन जिता: सर्वे महीपा हुग्रतेजसा

قال دِهْرِتَرَاشْتْرَا: «هو وحده حمى آلَ بَهَارَتَا؛ وهو وحده أرضى بَهَفَا (شِيفَا). وبذلك المحارب الواحد ذي البهاء العنيف هُزم جميع الملوك.»

Verse 5

नते निन्द्या: प्रशस्यास्ते यत्ते चक्रुर्ब्रवीहि तत्‌ ततो दुर्योधन: सूत पश्चात्‌ किमकरोत्‌ तदा

قال دِهْرِتَرَاشْتْرَا: «لذلك فهؤلاء الرجال—جنودًا كانوا أم ملوكًا من جانبنا—لا يستحقون اللوم، بل هم أهلٌ للثناء. أخبرني ماذا فعلوا. ثم، يا سُوتَا، بعد أن عاد دُرْيُودْهَنَا إلى معسكر الجيش، ماذا صنع في ذلك الحين؟»

Verse 6

संजय उवाच हतप्रहतविध्वस्ता विवर्मायुधवाहना: । दीनस्वरा दूयमाना मानिन: शत्रुनिर्जिता:

قال سانجيا: ضُرِبوا وأُنهِكوا وتَحَطَّموا—وقد جُرِّدوا من الدروع والسلاح والركائب—أولئك المحاربون الذين كانوا بالأمس أهلَ كبرياء، صاروا اليوم بأصواتٍ واهنة وقلوبٍ تحترق ألماً، واقفين مهزومين أمام العدو.

Verse 7

संजय बोले--राजन्‌! कौरव-सैनिक बाणोंसे घायल, छिन्न-भिन्न अवयवोंसे युक्त और अपने वाहनोंसे भ्रष्ट हो गये थे। उनके कवच, आयुध और वाहन नष्ट हो गये थे। उनके स्वरोंमें दीनता थी। शत्रुओंसे पराजित होनेके कारण वे स्वाभिमानी कौरव मन-ही-मन बहुत दुःख पा रहे थे ।।

قال سانجيا: أيها الملك، إن جنود الكورافا قد جُرحوا بالسهام، وتقطّعت أعضاؤهم، وسقطوا عن ركائبهم. وقد تكسّرت دروعهم وأسلحتهم ومراكبهم، وبدت في أصواتهم نبرةُ الذلّ والانكسار. ولأنهم هُزموا على يد الأعداء، عانى أولئك الكورافا المتكبّرون في سرائرهم حزناً شديداً. فلما عادوا إلى المعسكر أخذوا يتشاورون سراً من جديد—كالأفاعي التي كُسرت أنيابها ونُزعت سُمومها، ثم دِيست تحت الأقدام.

Verse 8

तानब्रवीत्‌ ततः कर्ण: क्रुद्धः सर्प इव श्वसन्‌ | करं करेण निष्पीड्य प्रेक्षमाणस्तवात्मजम्‌

ثم إن كارنا، وقد اشتعل غضباً وهو يَفُحّ كالأفعى، ضغط يداً بيد، وثبّت نظره على ابنك، وخاطب أولئك الأبطال من الكورافا قائلاً—

Verse 9

यत्तो दृढश्न दक्षश्व धृतिमानर्जुनस्तदा । सम्बोधयति चाप्येनं यथाकालमधोक्षज:,“अर्जुन सावधान, दृढ़, चतुर और धैर्यवान्‌ हैं। साथ ही उन्हें समय-समयपर श्रीकृष्ण भी कर्तव्यका ज्ञान कराते रहते हैं

قال سانجيا: «في ذلك الحين كان أرجونا يقظاً ثابتاً ماهراً صبور العزم؛ وكان الرب أدهوكشجا (شري كريشنا) أيضاً ينهضه ويعلّمه في الأوقات المناسبة، مذكّراً إياه بواجبه.»

Verse 10

सहसास्त्रविसर्गेण वयं तेनाद्य वज्चिता: । श्वस्त्वहं तस्य संकल्पं सर्व हन्‍ता महीपते

قال سانجيا: «بإطلاقٍ مفاجئٍ للأسلحة خدعنا اليوم. ولكن، أيها الملك، غداً سأحطم جميع تدابيره.»

Verse 11

एवमुक्तस्तथेत्युक्त्वा सोडनुजज्ञे नृपोत्तमान्‌ तेडनुज्ञाता नृपा: सर्वे स्वानि वेश्मानि भेजिरे

فلما خوطِبَ بذلك أجابَ دُريودَهَنَةُ: «فليكن كذلك»، ثم أذنَ لأشرفِ الملوك أن ينصرفوا إلى الراحة. فلما نالوا الإذنَ انكفأَ أولئك الحكّامُ جميعًا إلى مقارّهم في المعسكر.

Verse 12

सुखोषितास्तां रजनीं हृष्टा युद्धाय निर्ययु: । तेडपश्यन्‌ विदहितं व्यूहं धर्मराजेन दुर्जयम्‌

قالَ سَنجايا: بعدما قضَوا تلك الليلةَ في راحةٍ وسعة، ونهضوا مبتهجين، خرجوا إلى القتال. ثم أبصروا التشكيلَ الحربيَّ الذي رتّبهُ دَهرماراجا—صفًّا عسيرَ الاختراق.

Verse 13

अथ प्रतीपकर्तरिं प्रवीरं परवीरहा

قالَ سَنجايا: ثم تقدّمَ البطلُ الجبّار—قاتلُ أبطالِ العدوّ—نحو من قامَ له خصمًا، عازمًا على مجابهته وكسرِ شوكته.

Verse 14

सस्मार वृषभस्कन्ध॑ कर्ण दुर्योधनस्तदा । तदनन्तर शत्रुवीरोंका संहार करनेवाले दुर्योधनने शत्रुओंके विरुद्ध व्यूह-रचनामें समर्थ और वृषभके समान पुष्ट कंधोंवाले प्रमुख वीर कर्णका स्मरण किया ।।

قالَ سَنجايا: عندئذٍ تذكّرَ دُريودَهَنَةُ كَرْنَةَ، عريضَ المنكبين كالثور. ثم، وقد عزمَ على إفناءِ أبطالِ العدوّ، استحضرَ في خاطره ذلك الفارسَ الأوّل كَرْنَةَ—الماهرَ في ترتيبِ الصفوفِ والكتائبِ ضدّ الخصوم، ذا المنكبين القويّين كالثور. في الحرب كان كـ«بورندرا» (إندرا)، وفي القوّة كجماعاتِ «الماروت».

Verse 15

सर्वेषां चैव सैन्यानां कर्णमेवागमन्मन: । सूतपुत्रं महेष्वासं बन्धुमात्ययिकेष्विव

قالَ سَنجايا: إنّ قلوبَ الجيوشِ كلّها لم تتجه إلا إلى كَرْنَة—إلى ابنِ السائقِ، الرامي العظيم—كما أنّ المرءَ في ساعةِ الخطرِ الجسيمِ يندفعُ فكرهُ تلقائيًّا إلى قريبٍ موثوقٍ به.

Verse 16

जैसे प्राण-संकटकालमें लोग अपने बन्धुजनोंका स्मरण करते हैं, उसी प्रकार समस्त सेनाओंमेंसे केवल महाधनुर्धर सूतपुत्र कर्णकी ओर ही उसका मन गया ।।

قال سنجيا: كما أنّ الناس في ساعة الخطر المميت يذكرون ذوي قرباهم، كذلك—وسط الجيوش كلّها—لم يذهب قلبه إلا إلى كَرْنَة، ابن السائق، حامل القوس العظيم. قال دِهْرِتَراشْتْرَة: فماذا صنع دُريودَهَنَة بعد ذلك، يا سنجيا، حين مضى فكره—مضطربًا متذبذبًا—إلى كَرْنَة فايكَرْتَنَة؟

Verse 17

कृते<वहारे सैन्यानां प्रवृत्ते च रणे पुन:

قال سنجيا: «أيها الملك دِهْرِتَراشْتْرَة، بعد أن انسحبت الجيوش وعادت إلى المعسكر، ولما انقضت الليلة وابتدأ القتال من جديد عند الفجر—كيف قاتل كَرْنَة فايكَرْتَنَة هناك، وبأي هيئة شرع جميع الباندافا في مقاتلة كَرْنَة، ابن السائق؟»

Verse 18

कथं वैकर्तन: कर्णस्तत्रायुध्यत संजय । कथं च पाण्डवा: सर्वे युयुधुस्तत्र सूतजम्‌

قال سنجيا: «أخبرني، يا سنجيا: كيف قاتل كَرْنَة فايكَرْتَنَة هناك؟ وكيف قاتل جميع الباندافا هناك كَرْنَة، ابن السائق؟»

Verse 19

कर्णो होको महाबाहुर्हन्यात्‌ पार्थान्‌ ससूंजयान्‌ । कर्णस्य भुजयोर्वीर्य शक्रविष्णुसमं युधि

قال سنجيا: «إن كَرْنَة، البطل عظيم الساعدين، يستطيع وحده أن يقتل أبناء پِرِثا ولو كانوا مع سُونْجَيَة. وفي ساحة القتال تكون قوة ذراعي كَرْنَة كقوة إندرا وڤِشْنُو.» وإذ فكّر الملك دُريودَهَنَة في ذلك، سكر بالثقة في الحرب، متخذًا كَرْنَة عُمدته الكبرى.

Verse 20

तस्य शस्त्राणि घोराणि विक्रमश्न महात्मन: । कर्णमश्रित्य संग्रामे मत्तो दुर्योधनो नृप:

قال سنجيا: إذ تأمّل أسلحة كَرْنَة المروّعة وبأس ذلك المحارب العظيم النفس العجيب، اتّخذ الملك دُريودَهَنَة كَرْنَة سندَه الأوّل في المعركة، فسكر بالثقة.

Verse 21

दुर्योधनं ततो दृष्टवा पाण्डवेन भुशार्दितम्‌ । पराक्रान्तान्‌ पाण्डुसुतान्‌ दृष्टयवा चापि महारथ:

قال سانجيا: ثمّ إنّه، إذ رأى دُريودَهَنَة مُثقلًا بالألم أشدّ الإِثقال على يد أحد أبناء باندو، ورأى كذلك أبناء باندو يُظهرون بأسهم في ساحة القتال، أجاب المحارب العظيم على العربة، كارنا، مقتضى الحال—فكان فعله التالي وليدَ وفائه لفريقه تحت ضغط الدارما والحرب.

Verse 22

कर्णमाश्रित्य संग्रामे मन्‍्दो दुर्योधन: पुनः । जेतुमुत्सहते पार्थान्‌ सपुत्रान सहकेशवान्‌

قال سانجيا: في خضمّ المعركة، عاد دُريودَهَنَة الغليظ الفهم فاحتمى بكارنا مرة أخرى، واشتدّ حماسه لأن يقهر أبناء باندو—مع أبنائهم—بل وحتى كيشافا (كريشنا). وتُبرز الآية كيف يمكن للغرور والاتكال الأعمى على قوة السلاح أن يطمسا البصيرة والحكم الأخلاقي في الحرب.

Verse 23

अहो बत महद्‌ दु:खं यत्र पाण्डुसुतान्‌ रणे । नातरद्‌ रभस: कर्णो दैवं नूनं परायणम्‌,अहो! यह महान्‌ दुःखकी बात है कि वेगशाली वीर कर्ण भी रणभूमिमें पाण्डवोंसे पार न पा सका। अवश्य दैव ही सबका परम आश्रय है

قال سانجيا: «وا أسفاه—ما أعظم هذا الحزن: ففي ساحة القتال لم يستطع حتى البطل المندفع كارنا أن يشقّ طريقه عبر أبناء باندو. لا ريب أن الدَّيْوَ (القدر) هو الملجأ الأخير والسلطان الحاسم على الجميع.»

Verse 24

अहो द्यूतस्य निष्ठेयं घोरा सम्प्रति वर्तते । अहो तीव्राणि दु:ःखानि दुर्योधनकृतान्यहम्‌

قال سانجيا: «وا أسفاه، إن العاقبة الرهيبة لمباراة النرد تتكشف الآن. وا أسفاه، ما أشدّ الآلام التي جلبتها أفعال دُريودَهَنَة—آلامًا بات لزامًا علينا أن نكابدها.»

Verse 25

सौबलं च तदा तात नीतिमानिति मन्यते

قال سانجيا: «وفي ذلك الحين، يا سيدي، كان يعدّ ساوبالا رجلًا ذا سياسةٍ رشيدة.»

Verse 26

यदेवं वर्तमानेषु महायुद्धेषु संजय

قال سانجيا: «حين تتكشف مثل هذه المعارك العظمى، يا سانجيا، يقتحمون صفوف جيشنا بلا خوف، كما يدخل الرجال إلى وسط النساء آمنين؛ حقًّا إن القدر هو القوة الأشد. ومن ما أسمعه يومًا بعد يوم—بعض أبنائي قُتلوا، وبعضهم هُزموا—بلغتُ يقينًا أنه في ساحة القتال لا يوجد بطل يستطيع أن يصدّ الباندافا حقًّا. إنهم ينفذون إلى جيشي دون تردد؛ وفي هذا الأمر يغلب سلطان القضاء والقدر غلبةً ساحقة».

Verse 27

अश्रौषं निहतान्‌ पुत्रान्‌ नित्यमेव विनिर्जितान्‌ | न पाण्डवानां समरे कक्षिदस्ति निवारक:

قال سانجيا: «لقد سمعتُ أن أبناءنا يُقتلون—مرة بعد مرة، ويُغلبون على الدوام. وفي القتال لا أحد يستطيع أن يصدّ الباندافا أو يردّهم إلى الوراء».

Verse 28

संजय उवाच राजन पूर्वनिमित्तानि धर्मिष्ठानि विचिन्तय

قال سانجيا: «أيها الملك، تأمّل الأسباب الأولى—تلك الاعتبارات التي عرضتها يومًا على أنها الأوفق بالدارما. فإن الرجل إذا أجهد نفسه بعد وقوع الأمر بالتحسّر على ما مضى، لا يجعل ذلك الفعل يتحقق من جديد (ولا يبطله)؛ وإنما يفسد نفسه بمثل هذا الهمّ».

Verse 29

अतिकान्तं हि यत्‌ कार्य पश्चाच्चिन्तयते नर: । तच्चास्य न भवेत्‌ कार्य चिन्तया च विनश्यति

قال سانجيا: «أيها الملك، إذا ظلّ الرجل بعد فوات الأمر يضطرب فكرًا على فعلٍ مضى ولا رجعة فيه، فإن ذلك الفعل لا يتحقق من جديد (ولا يُمحى) بقلقه؛ بل إنما يهلك هو بفرط هذا الهمّ. فاذكر ما كنتَ قد سقتَه من تبريرات، ولا تُفْنِ نفسك ندمًا على ما لا سبيل إلى تغييره الآن».

Verse 30

इस प्रकार श्रीमह्ाभारत कर्णपर्वमें प्रथम दिनका युद्धविषयक तीसवाँ अध्याय पूरा हुआ

قال سانجيا: «إن هذا المسعى الذي أقدمتَ عليه—مع أنك كنتَ تعلم أن الظفر به بعيد المنال—قد مضيتَ فيه من غير أن تزن أولًا ما ينبغي فعله وما لا ينبغي فعله. وفي شأن اغتصاب مملكة الباندافا، لم تتفكّر سلفًا في حقّ الفعل أو بطلانه، مع علمك بأن العاقبة لا يُرجى أن تكون في صالحك».

Verse 31

उक्तो5सि बहुधा राजन्‌ मा युध्यस्वेति पापडवै: । गृह्नीषे न च तनन्‍्मोहाद्‌ वचनं च विशाम्पते

قال سانجيا: «أيها الملك، لقد قال لك أبناء باندو مرارًا وتكرارًا: لا تُشعل الحرب. ولكن يا سيد الرعية، لم تقبل نصيحتهم بسبب الوهم والضلال».

Verse 32

त्वया पापानि घोराणि समाचीर्णानि पाण्डुषु । त्वत्कृते वर्तते घोर: पार्थिवानां जनक्षय:,आपने पाण्डवोंपर भयंकर अत्याचार किये हैं। आपके ही कारण राजाओंद्वारा यह घोर नरसंहार हो रहा है

قال سانجيا: «لقد ارتكبت آثامًا مروّعة في حق أبناء باندو. وبسببك تتكشف الآن هذه الكارثة الرهيبة: هلاك الملوك وشعوبهم.»

Verse 33

तत्त्विदानीमतिक्रान्तं मा शुचो भरतर्षभ | शृणु सर्व यथावृत्तं घोरं वैशसमुच्यते

قال سانجيا: «لقد مضى ذلك الأمر الآن؛ فلا تحزن، يا ثور آل بهاراتا. اسمع الخبر كله كما وقع. سأقصّ عليك المذبحة والخراب المروّعين اللذين حدثا.»

Verse 34

प्रभातायां रजन्यां तु कर्णो राजानमभ्ययात्‌ । समेत्य च महाबाहुर्दुर्योधनमथाब्रवीत्‌,जब रात बीती और प्रात:ःकाल हो गया, तब महाबाहु कर्ण राजा दुर्योधनके पास आया और उससे मिलकर इस प्रकार बोला

فلما انقضى الليل وأقبل الفجر، مضى كارنا، عظيم الساعدين، إلى الملك دوريودhana. فلما لقيه خاطبه البطل قائلاً على هذا النحو.

Verse 35

कर्ण उवाच अद्य राजन्‌ समेष्यामि पाण्डवेन यशस्विना । निहनिष्यामि तं वीरं स वा मां निहनिष्यति

قال كارنا: «أيها الملك، اليوم سألاقي في القتال الباندافيَّ المجيد (أرجونا). فإما أن أصرع ذلك البطل، وإما أن يصرعني هو.»

Verse 36

बहुत्वान्मम कार्याणां तथा पार्थस्य भारत । नाभूत्‌ समागमो राजन्‌ मम चैवार्जुनस्य च,भरतवंशी नरेश! मेरे तथा अर्जुनके सामने बहुत-से कार्य आते गये; इसीलिये अबतक मेरा और उनका द्वैरथ युद्ध न हो सका

يا من سلالة بهاراتا! لقد توالت عليّ أعمالٌ مُلحّة كثيرة، وكذلك على بارثا (أرجونا)، ولذلك لم تتأتَّ إلى الآن، أيها الملك، فرصةٌ لأن ألقى أرجونا وجهًا لوجه في مبارزةٍ مباشرةٍ على العربات.

Verse 37

इदं तु मे यथाप्राज्ञं शृणु वाक्यं विशाम्पते । अनिहत्य रणे पार्थ नाहमेष्यामि भारत

قال كارنا: «يا سيد الناس، أصغِ بإمعان إلى هذه الكلمات التي أنطق بها على قدر أحسن ما عندي من رأي. يا بهاراتا، ما لم أصرع بارثا (أرجونا) في ساحة القتال فلن أعود.»

Verse 38

हतप्रवीरे सैन्येडस्मिन्‌ मयि चावस्थिते युधि । अभियास्यति मां पार्थ: शक्रशक्तिविनाकृतम्‌

حين يُقتل أبطال جيشنا المتقدّمون، وأظلّ أنا ثابتًا في القتال داخل هذه الصفوف، فإن بارثا (أرجونا) سيُقبل عليّ مهاجمًا، إذ يعلم أنني قد حُرمت من «شاكتي» التي منحها إندرا.

Verse 39

तत: श्रेयस्करं यच्च तन्निबोध जनेश्वर । आयुधानां च मे वीर्य दिव्यानामर्जुनस्य च,जनेश्वर! अब जो यहाँ हितकर बात है, उसे सुनिये। मेरे तथा अर्जुनके पास भी दिव्यास्त्रोंका समान बल है

فإذن، يا سيد الرجال، اعلم ما هو الأجدر بالخير هنا. ففي شأن الأسلحة الإلهية، إن القوة التي في يدي والقوة التي في يد أرجونا متساويتان.

Verse 40

कायस्य महतो भेदे लाघवे दूरपातने । सौष्ठवे चास्त्रपाते च सव्यसाची न मत्सम:

قال كارنا: «في اختراق الأجساد العظيمة، وفي السرعة، وفي إصابة الأهداف من بعيد، وفي أناقة القتال، وفي إطلاق المقذوفات واستعمالها— فإن سافياساشين أرجونا ليس ندًّا لي.»

Verse 41

प्राणे शौर्येडथ विज्ञाने विक्रमे चापि भारत । निमित्तज्ञानयोगे च सव्यसाची न मत्सम:

قال كارنا: «يا بهاراتا، في قوة الحياة والجلَد، وفي البأس، وفي إتقان السلاح والمعرفة، وفي البراعة القتالية كذلك—بل حتى في البصيرة المنضبطة التي يُهتدى بها إلى وسائل قهر العدو—فإن سافياساشي أرجونا ليس نِدًّا لي».

Verse 42

सर्वायुधमहामात्रं विजयं नाम तद्धनुः । इन्द्रार्थ प्रियकामेन निर्मित विश्वकर्मणा,मेरे धनुषका नाम विजय है। यह समस्त आयुधोंमें श्रेष्ठ है। इसे इन्द्रका प्रिय चाहनेवाले विश्वकर्माने उन्हींके लिये बनाया था

قال كارنا: «هذا القوس يُدعى فيجايا (Vijaya). وهو أسمى الأسلحة جميعًا. وقد صاغه فيشفاكَرمان (Viśvakarman) لإندرا رغبةً في إرضائه».

Verse 43

येन दैत्यगणान्‌ राजज्जितवान्‌ वै शतक्रतुः । यस्य घोषेण दैत्यानां व्यामुहान्त दिशो दश

قال كارنا: «أيها الملك، بهذا القوس بعينه قهر إندرا—قاصم الأعداء—جماعات الدايتيَة؛ وبطنينه المدوّي اضطربت الدايتيَة حتى عجزوا عن تمييز الجهات العشر. ذلك القوس الإلهي، الأعزّ إلى إندرا، كان قد منحه قديمًا لباراشوراما (Paraśurāma)، وها هو باراشوراما قد وهبني الآن ذلك القوس السماويّ الممتاز».

Verse 44

तद्‌ भार्गवाय प्रायच्छच्छक्र: परमसम्मतम्‌ । तद्‌ दिव्यं भार्गवो महा[मददादू धनुरुत्तमम्‌

قال كارنا: «إن إندرا، حامل القرص، وقد جعله في أرفع منزلة، وهب ذلك القوس الإلهي لبهارغافا (باراشوراما). ثم إن بهارغافا العظيم النفس، بدوره، أعطاني ذلك القوس الأسمى».

Verse 45

तेन योत्स्ये महाबाहुमर्जुनं जयतां वरम्‌ । यथेन्द्र: समरे सर्वान्‌ दैतेयान्‌ वै समागतान्‌

قال كارنا: «وبذلك القوس سأقاتل أرجونا عظيم الساعدين، خيرَ الظافرين من الأبطال؛ كما قاتل إندرا في المعركة جميعَ الدايتيَة الذين اجتمعوا.»

Verse 46

धनुर्घोरें रामदत्तं गाण्डीवात्‌ तद्‌ विशिष्यते । त्रिस्सप्तकृत्व: पृथिवी धनुषा येन निर्जिता

قال كارنا: «هذا القوس المهيب، الذي وهبه راما (باراشوراما)، يفوق حتى الغانديفا. وهو القوس نفسه الذي به قهر باراشوراما الأرض إحدى وعشرين مرة».

Verse 47

धनुषो हास्य कर्माणि दिव्यानि प्राह भार्गव: । तद्‌ रामो हाददान्महां तेन योत्स्यामि पाण्डवम्‌

قال كارنا: «لقد أخبرني البهارغافا (باراشوراما) بأعمال هذا القوس الإلهية، ثم إن راما نفسه قد أودعه في يدي. وبهذا القوس سأقاتل أرجونا ابن باندو.»

Verse 48

अद्य दुर्योधनाहं त्वां नन्दयिष्ये सबान्धवम्‌ | निहत्य समरे वीरमर्जुनं जयतां वरम्‌,दुर्योधन! आज मैं समरभूमिमें विजयी पुरुषोंमें श्रेष्ठ वीर अर्जुनका वध करके बन्धु- बान्धवोंसहित तुम्हें आनन्दित करूँगा

قال كارنا: «اليوم، يا دوريودانا، سأبهجك مع جميع ذويك. فإذا قتلتُ في المعركة البطل أرجونا—الأول بين الظافرين—جلبتُ لك السرور.»

Verse 49

सपर्वतवनद्वीपा हतवीरा ससागरा | पुत्रपौत्रप्रतिष्ठा ते भविष्यत्यद्य पार्थिव

قال كارنا: «أيها الملك، إذا قُتل ذلك البطل، فإن هذه الأرض كلها—بجبالها وغاباتها وجزرها وبحارها المحيطة—وقد خلت من أبطالها، ستغدو اليوم راسخة في سلالتك، ميراثًا دائمًا لأبنائك وأحفادك.»

Verse 50

नाशक्यं विद्यते मेडद्य त्वत्प्रियार्थ विशेषत: । सम्यग्धर्मानुरक्तस्य सिद्धिरात्मवतो यथा

قال كارنا: «أما أنا اليوم، ولا سيما ابتغاء ما يرضيك، فلا شيء يستحيل عليّ. فكما أن الظفر لا يعسر على الرجل المتزن المتمسك بالدارما الحقّة، كذلك لا عمل يتجاوز قدرتي إذا كان لإتمام رغبتك.»

Verse 51

न हि मां समरे सोदुं संशक्तोडग्निं तरुर्यथा । अवश्यं तु मया वाच्यं येन हीनो5स्मि फाल्गुनात्‌

كما أنّ الشجرة لا تطيق هجوم النار، كذلك لا يملك أرجونا في ساحة القتال قوةً تحتمل اندفاعي. غير أنّ ما أكون فيه دون فالغونا (أرجونا) ينبغي أن يُقال لي لا محالة.

Verse 52

ज्या तस्य धनुषो दिव्या तथाक्षय्ये महेषुधी । सारथिस्तस्य गोविन्दो मम तादृड्ध न विद्यते

وترُ قوسه إلهيّ، وله جعبتان عظيمتان سماويتان لا تنفدان من السهام. وغوفيندا نفسه هو سائس مركبته. أمّا مثل هذه المزايا فليست في جانبي.

Verse 53

तस्य दिव्यं धनु: श्रेष्ठ गाण्डीवमजितं युधि । विजयं च महद्दिव्यं ममापि धनुरुत्तमम्‌

إنّ لديه القوس الإلهيّ الأسمى «غانديفا»، الذي لا يُقهر في الحرب. غير أنّ لي أنا أيضًا قوسًا عظيمًا إلهيًّا ممتازًا يُدعى «فيجايا».

Verse 54

तत्राहमधिक: पार्थाद्‌ धनुषा तेन पार्थिव । येन चाप्यधिको वीर: पाण्डवस्तन्निबोध मे

أيها الملك، إنّي في شأن القوس أَفْضَلُ من بارثا. ولكن، أيها الراجن، اسمع مني السبب الذي به يغدو ذلك البطل ابن باندو أسمى مني.

Verse 55

रश्मिग्राहश्व दाशार्ह: सर्वलोकनमस्कृत: । अन्निदत्तश्न वै दिव्यो रथ: काज्चनभूषण:

إنّ دَاشارها (شري كريشنا)، الموقَّر لدى العوالم كلّها، هو الذي يمسك زمام خيوله. ومركبة أرجونا مركبةٌ إلهية وهبها أغني وزيّنها بالذهب—عربةٌ خارقة عسيرة الإهلاك. وخيوله سريعة كالفكر، ولواؤه المتألّق إلهيّ كذلك، تعلوه قِرْدةٌ جالسة تُدهش الناظرين.

Verse 56

अच्छेद्य: सर्वतो वीर वाजिनश्न मनोजवा: । ध्वजश्न दिव्यो द्युतिमान्‌ वानरो विस्मयंकर:

قال كارنا: «أيها البطل، إن عَرَبَتَهُ منيعةٌ من كل جانب—لا سلاحَ يقدر على تدميرها. وخيولُهُ سريعةٌ كالفكر. ورايتُهُ متلألئةٌ إلهية، وعلى قمّتها يجلسُ القِردُ العجيبُ الذي يملأُ الجميعَ دهشةً.»

Verse 57

कृष्णश्र स्रष्टा जगतो रथं तमभिरक्षति । एतैद्रैव्यैरहं हीनो योद्धुमिच्छामि पाण्डवम्‌

قال كارنا: «كِرِشنا، خالقُ العالم ومُدبِّرُه، يحمي تلك العربة (عربة أرجونا). ومع أنني محرومٌ من مثل هذه المعونات الإلهية، فإني ما زلت أرغب في قتال الباندافا.»

Verse 58

अयं तु सदृश: शौरे: शल्य: समितिशोभन: । सारथ्यं यदि मे कुर्याद्‌ ध्रुवस्ते विजयो भवेत्‌

قال كارنا: «هذا شاليا—المتألّق في صدام الجيوش—يشبه شَوري (كِرِشنا). فإن تولّى قيادة مركبتي سائقًا لها، كان النصر لكم محقَّقًا.»

Verse 59

तस्य मे सारथि: शल्यो भवत्वसुकर: परै: । नाराचान्‌ गार्ध्रपत्रांक्ष शकटानि वहन्तु मे

قال كارنا: «ليكن شاليا سائقي—ذلك الذي لا يَسهل على الأعداء قهرُه. ولتُواصل عرباتٌ كثيرةٌ جلبَ سهام النّاراجا (nārāca) إليّ، وقد زُوِّدت سيقانُها بريش النَّسر الرَّخَم، لكي أضغط القتال على خصومي بلا عائق.»

Verse 60

रथाश्न मुख्या राजेन्द्र युक्ता वाजिभिरुत्तमै: । अयान्तु पश्चात्‌ सततं मामेव भरतर्षभ,राजेन्द्र! भरतश्रेष्ठ! उत्तम घोड़ोंसे जुते हुए अच्छे-अच्छे रथ सदा मेरे पीछे चलते रहें

قال كارنا: «أيها الملك، يا فحلَ آلِ بهاراتا، لتسِرْ خلفي على الدوامِ العرباتُ الأوْلى، المقرونةُ بأفضلِ الخيول، تتبعني أنا وحدي.»

Verse 61

एवमभ्यधिक: पार्थाद्‌ भविष्यामि गुणैरहम्‌ । शल्यो<प्यधिक: कृष्णादर्जुनादपि चाप्यहम्‌

قال كارنا: «إن رُتِّبت الأمور على هذا النحو فسأتفوّق على بارثا (أرجونا) في صفات الفضل والمهارة. بل إن شاليا أعظم من كريشنا، وأنا كذلك أسمى من أرجونا. في ساحة القتال لا تقدر الآلهة ولا الأسورا على النهوض لمواجهتي—فكيف بأبناء باندو، يا أيها الملك، وهم مولودون من جنس البشر؟»

Verse 62

यथाश्वह्गदयं वेद दाशार्ह: परवीरहा । तथा शल्यो विजानीते हयज्ञानं महारथ:

قال كارنا: «كما أن داشارهـا (شري كريشنا)، قاتل أبطال الأعداء، يعرف سرَّ فنّ الخيل، كذلك فإن المقاتل العظيم على العربة شاليا يدرك علم الخيل.»

Verse 63

बाहुवीयें समो नास्ति मद्रराजस्य कश्चन । तथान्त्रे मत्समो नास्ति कश्रिदेव धनुर्धर:

قال كارنا: «في قوة الساعد لا أحد يساوي ملك مادرا شاليا. أمّا في إتقان السلاح وعلم المقذوفات، فلا رامٍ بالقوس يساويني.»

Verse 64

तथा शल्यसमो नास्ति हयज्ञाने हि कश्षन । सो5यमभ्यधिक: कृष्णाद्‌ भविष्यति रथो मम,अश्वविज्ञानमें भी शल्यके समान कोई नहीं है। शल्यके सारथि होनेपर मेरा यह रथ अर्जुनके रथसे बढ़ जायगा

قال كارنا: «في علم الخيل لا أحد يضاهي شاليا. فإذا كان شاليا سائس عربتي، فإن عربتي هذه ستفوق حتى عربة أرجونا التي يقودها كريشنا.»

Verse 65

एवं कृते रथस्थो5हं गुणैरभ्यधिको<र्जुनात्‌ । भवे युधि जयेयं च फाल्गुनं कुरुसत्तम

قال كارنا: «إن فُعِل هذا، فإني—واقفًا على عربتي—سأتفوّق على أرجونا بأسًا وخصالًا، وفي الحرب سأغلب فالغونا (أرجونا). يا خيرَ الكورو، فليُنجَز هذا الأمر.»

Verse 66

एतत्‌ कृतं महाराज त्वयेच्छामि परंतप

قال كارنا: «لقد أُنجِز هذا، أيها الملك العظيم؛ وإني أبتغيه منك، يا مُحرِقَ الأعداء.»

Verse 67

एवं कृते कृतं साहां सर्वकामैर्भविष्यति

قال كارنا: «إن فُعِل هذا نلتُ عونًا تامًّا على وفق جميع مقاصدي. يا بهاراتا، ما سأفعله عندئذٍ في القتال ستراه بعينيك. وفي ساحة الحرب سأغلب يقينًا، بكل وجه، جميع الباندافا الذين يأتون لملاقاتي.»

Verse 68

ततो द्रक्ष्यसि संग्रामे यत्‌ करिष्यामि भारत । सर्वथा पाण्डवान्‌ संख्ये विजेष्ये वै समागतान्‌

«ثم يا بهاراتا سترى في المعركة ما سأصنع. وفي صدام السلاح سأهزم يقينًا، بكل وجه، الباندافا الذين قدموا إلى الميدان.»

Verse 69

राजन! समरांगणमें देवता और असुर भी मेरा सामना नहीं कर सकते, फिर मनुष्य- योनिमें उत्पन्न हुए पाण्डव तो कर ही कैसे सकते हैं

قال كارنا: «أيها الملك، في ساحة القتال لا يقدر حتى الآلهة ولا الأسورا أن يثبتوا أمامي؛ فكيف يقدر الباندافا، وهم مولودون في حال البشر، على ذلك؟»

Verse 70

संजय उवाच एवमुक्तस्तव सुतः कर्णेनाहवशोभिना । सम्पूज्य सम्प्रह्ृष्टात्मा ततो राधेयमब्रवीत्‌

قال سنجيا: «أيها الملك، لما قال كارنا، زينة ساحة القتال، ذلك القول، انشرح قلب ابنك دوريوذانا. ثم أكرم رادهيّا (كارنا) إكرامًا تامًّا وقال له…»

Verse 71

दुर्योधन उवाच एवमेतत्‌ करिष्यामि यथा त्वं कर्ण मन्यसे । सोपासज्ा रथा: साथ्वा: स्वनुयास्यन्ति संयुगे

قال دوريوذانا: «فليكن ذلك. يا كارنا، سأفعل تمامًا كما تراه أنت صوابًا. وفي غمار القتال ستتبعك عن كثب عرباتٌ تجرّها الخيل، مُعَدَّةٌ بالمؤن وبقوة الإسناد.»

Verse 72

नाराचान्‌ गार्ध्रपत्रांक्ष शकटानि वहन्तु ते । अनुयास्याम कर्ण त्वां वयं सर्वे च पार्थिवा:

قال دوريوذانا: «لتجلب لك العربات سهام النّاراجا، وقد زُوِّدت سيقانها بريش النسر. يا كارنا، نحن أنفسنا—ومعنا جميع الملوك—سنزحف خلفك.»

Verse 73

संजय उवाच एवमुकक्‍्त्वा महाराज तव पुत्र: प्रतापवान्‌ | अभिगम्याब्रवीद्‌ राजा मद्रराजमिदं वच:,संजय कहते हैं--महाराज! ऐसा कहकर आपके प्रतापी पुत्र राजा दुर्योधनने मद्रराज शल्यके पास जाकर इस प्रकार कहा--

قال سانجيا: «أيها الملك العظيم، لما قال ابنك الشجاع—الملك—ذلك، دنا من شاليا، ملك مادرا، وخاطبه بهذه الكلمات.»

Verse 126

प्रयत्नात्‌ कुरुमुख्येन बृहस्पत्युशनोमते । वहाँ रातभर सुखसे रहे। फिर प्रसन्नतापूर्वक युद्धके लिये निकले। निकलकर उन्होंने देखा कि कुरुवंशके श्रेष्ठ पुरुष धर्मराज युधिष्छिरने बृहस्पति और शुक्राचार्यके मतके अनुसार प्रयत्नपूर्वक अपनी सेनाका दुर्जय व्यूह बना रखा है

قال سانجيا: «بجهدٍ متعمَّد رتّب أَشرفُ الكورو تشكيلًا حربيًّا مهيبًا وفق التعاليم الاستراتيجية المنسوبة إلى بريهاسباتي وأوشَنَس (شوكراچاريا). وبعد أن قضَوا الليل في سكينة، خرجوا إلى القتال بقلوبٍ منشرحة؛ فلما برزوا رأوا أن دارماراجا يودهيشثيرا قد بذل هو أيضًا عنايةً كبيرة فصفَّ جيشه في ڤيوها عسير الكسر، على وفق تلك القواعد نفسها.»

Verse 143

कार्तवीर्यसमं वीर्यें कर्ण राज्ञोडगमन्मन: । कर्ण युद्धमें इन्द्रके समान पराक्रमी, मरुदगणोंके समान बलवान तथा कार्तवीर्य अर्जुनके समान शक्तिशाली था। राजा दुर्योधनका मन उसीकी ओर गया

قال سانجيا: «لما رأى بأسَ كارنا—مساويًا لكارتافيرْيا في القوة، كإندرا في ساحة القتال، شديدًا كجماعات الماروت—مال قلبُ الملك دوريوذانا إليه، وجعل رجاءه واعتماده على كارنا بوصفه عماد مسعاه في الحرب.»

Verse 166

अप्यपश्यत राधेयं शीतार्ता इव भास्करम्‌ | धृतराष्ट्रने पूछा--सूत! तत्पश्चात्‌ दुर्योधनने क्या किया। मूर्खो! तुमलोगोंका मन जो वैकर्तन कर्णकी ओर गया था

قال سنجيا: «أكنتم جميعًا تنظرون إلى رادهيّا (كارنا) كما تنظر الكائنات التي أنهكها البرد إلى الشمس؟» تُبرز هذه العبارة أنّه في أزمة المعركة انصرف رجاءُ جانب الكورافا واهتمامُه إلى كارنا كأنه مصدرٌ وحيدٌ للدفء والقوة—كاشفةً اعتمادهم على بطلٍ واحد، وما في ذلك من توترٍ أخلاقي حين يُلتمس الملاذ في مجرد البأس الحربي بدلًا من الدارما.

Verse 243

सोढा घोराणि बहुश: शल्यभूतानि संजय । अहो! द्यूतक्रीडाका यह घोर परिणाम इस समय प्रकट हुआ है। संजय! आश्चर्य है कि मैंने दुर्योधनके कारण बहुत-से तीव्र एवं भयंकर दुःख

قال سنجيا: «لقد احتملتُ مرارًا وتكرارًا آلامًا مروّعة كثيرة—أوجاعًا صارت كالشوك ذي الشُعَب مغروزًا في الداخل. آهٍ! إن العاقبة الرهيبة لتلك المقامرة بالنرد قد انكشفت الآن، في هذه اللحظة بعينها. يا سنجيا، إنه لأمرٌ عجيب: بسبب دوريودhana حملتُ أحزانًا لا تُحصى، حادّةً ومخيفة، تلسع كالأشواك.»

Verse 256

कर्णश्न॒ रभसो नित्यं राजा त॑ चाप्यनुव्रत: । तात! दुर्योधन उन दिनों शकुनिको बड़ा नीतिज्ञ मानता था तथा वेगशाली वीर कर्ण भी नीतिज्ञ है, ऐसा समझकर राजा दुर्योधन उसका भी भक्त बना रहा

قال سنجيا: كان كارنا دائم الاندفاع سريع الفعل، وكان الملك (دوريودhana) يلازمه على ولاءٍ وتأييد. يا عزيزي، في تلك الأيام كان دوريودhana يعدّ شكوني بالغ الحذق في المشورة السياسية؛ وإذ ظنّ أن البطل الجسور كارنا أيضًا من العارفين بالسياسة والتدبير، صار له هو الآخر نصيرًا مخلصًا.

Verse 273

स्त्रीमध्यमिव गाहन्ते दैवं तु बलवत्तरम्‌ । संजय! इस प्रकार वर्तमान महान्‌ युद्धोंमें जो मैं प्रतेदिन ही अपने कुछ पुत्रोंको मारा गया और कुछको पराजित हुआ सुनता आ रहा हूँ

قال سنجيا: «إنهم يقتحمون كأنما يقتحمون وسط النساء؛ غير أن القدر أقوى. يا سنجيا، إذ أسمع يومًا بعد يوم أنّ في هذه الحرب العظمى يُقتل بعض أبنائي ويُهزم بعضهم، ترسّخ لديّ اليقين بأنه لا يوجد في ساحة القتال بطلٌ يستطيع حقًّا أن يصدّ الباندافا. وكما يدخل الناس بلا خوف بين النساء، كذلك يدخل الباندافا جيشي بلا تردد. في هذا الأمر، يتبيّن أن القضاء والقدر بالغ الغلبة.»

Verse 656

समुद्ातुं न शक्ष्यन्ति देवा अपि सवासवा: । ऐसी व्यवस्था कर लेनेपर जब मैं रथमें बैदूँगा

قال كارنا: «حتى الآلهة، وإندرا معهم، لن يقدروا على الصمود في وجهي. فإذا أتممتُ هذه التدابير وجلستُ على العربة، فإني سأفوق أرجونا في كل مزيّة. يا خيرَ الكورو، عندئذٍ سأغلب أرجونا في القتال لا محالة. بل إن جموع الآلهة كلها مع إندرا لن تستطيع مواجهتي.»

Verse 663

क्रियतामेष कामो मे मा व: कालो>त्यगादयम्‌ | शत्रुओंको संताप देनेवाले महाराज! मैं चाहता हूँ कि आपके द्वारा यही व्यवस्था हो जाय। मेरा यह मनोरथ पूर्ण किया जाय। अब आपलोगोंका यह समय व्यर्थ नहीं बीतना चाहिये

قال كارنا: «لْيُنفَّذْ هذا المُنى الذي في قلبي. لا تدعوا هذا الوقت الحاضر يفلت منكم سُدًى. أيها الملك الذي يُذيق الأعداء العذاب، أريدك أن تُدبِّر الأمور على هذا النحو بعينه وأن تُتمَّ عزيمتي.»

Frequently Asked Questions

The chapter stages a dilemma between maintaining command cohesion through restrained counsel versus escalating conflict through provocative speech; it also raises the ethical risk of grounding policy and judgment in stigmatizing hearsay about communities.

Speech functions as a moral instrument: effective leadership requires discernment, self-critique, and accountability for governance outcomes, rather than relying on rhetorical intimidation or generalized disparagement.

No explicit phalaśruti is stated; the meta-commentary is implicit in Saṃjaya’s closure—Karṇa’s silence after Śalya’s response frames the exchange as a cautionary example of counsel, ego, and ethical reflexivity within wartime narration.

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