Śalya’s Objection to Sārathya and Duryodhana’s Conciliation (शल्यमन्यु-प्रशमनम् / Sārathyāṅgīkāra)
शतचन्द्रं च तच्चर्म सर्वोपकरणानि च । मान्यवर! इसके बाद उसने अपने बाणोंद्वारा नकुलके उस दिव्य रथको तिल-तिल करके काट दिया और पताका, चक्ररक्षकों, गदा एवं खड्गको भी छिजत्न-भिन्न कर दिया। साथ ही सौ चन्द्राकार चिह्नोंसे सुशोभित उनकी ढाल तथा अन्य सब उपकरणोंको भी उसने नष्ट कर दिया
śatacandraṃ ca tac carma sarvopakaraṇāni ca |
قال سنجيا: لقد دمّر ذلك الترس الموسوم بمئة رمز قمري، ومعه سائر العُدّة والأدوات.
संजय उवाच