अथ कृष्णौ शरशतैरश्वत्थाम्नारदिता भृशम् स्वरश्मिजालविकचीौ युगान्ताकाविवासतु:,इसके बाद अभ्रृत्थामाने भी श्रीकृष्ण और अर्जुनको अपने सैकड़ों बाणोंद्वारा गहरी चोट पहुँचायी। उस समय वे दोनों अपनी किरणोंका प्रसार करनेवाले प्रलयकालके दो सूर्योंके समान प्रतीत होते थे
ثم إن أشڤتّامان بدوره أصاب شري كريشنا وأرجونا إصاباتٍ بالغة بمئات السهام. وفي تلك اللحظة بدوا كشمسين في زمن الفناء، يبسطان شبكة أشعتهما في كل ناحية.
संजय उवाच