द्रोणानीक-व्यतिक्रमः — Kṛṣṇa–Arjuna Break Through Droṇa’s Array
अभिमन्योर्व॑धं श्रुत्वा ध्रुवमार्तों धनंजय: । रात्रौ निर्यास्यति क्रोधादिति मत्वा व्यवस्थिता:,“वे यह समझकर युद्धके लिये उद्यत हो गये कि अभिमन्युके वधका वृत्तान्त सुनकर अर्जुनको अवश्य ही महान् कष्ट हुआ होगा; अतः वे क्रोध करके रातमें ही युद्धके लिये निकल पड़ेंगे
فاستعدّوا للقتال، إذ ظنّوا أنّ دهننجايا (أرجونا) لا بدّ أن يكون قد اعتصره ألمٌ عظيم حين سمع بخبر مقتل أبهيمانيو؛ ولذلك، بدافع الغضب، سيخرج إلى الحرب في الليل نفسه.
संजय उवाच