Omens and Consolation after Loss; Reaffirmation of the Saindhava Punishment Vow (उत्पात-दर्शनम्, आश्वासन-वाक्यानि, प्रतिज्ञा-स्थैर्यम्)
सा तत्र परमं तीव्र चचार व्रतमुत्तमम् । सा तदा होकपादेन तस्थौ पद्मानि षोडश,उसने वहाँ अत्यन्त कठोर और उत्तम व्रतका पालन आरम्भ किया। उस समय वह दयावश प्रजावर्गका हित करनेकी इच्छासे अपनी इन्द्रियोंको प्रिय विषयोंसे हटाकर इक्कीस पद्म वर्षोतक एक पैरपर खड़ी रही
هناك شرعت في نذرٍ بالغ الشدة، سامٍ في غايته. وفي ذلك الحين، بدافع الرحمة ورغبةً في خير الرعية، كفّت حواسّها عن محبوباتِها، وثبتت واقفةً على قدمٍ واحدة، تمارس التقشّف بثباتٍ لا يتزعزع زمناً طويلاً.
नारद उवाच