द्रोणानीकाभिमुखगमनम्
Abhimanyu advances toward Droṇa’s host
धनंजयो हि नस्तात गर्हयेदेत्य संयुगात् क्षिप्रमस्त्रं समादाय द्रोणानीकं विशातय,“तात! यदि हम विजयी नहीं हुए तो युद्धसे लौटनेपर अर्जुन निश्चय ही हमलोगोंको कोसेंगे, अतः शीघ्र अस्त्र लेकर तुम द्रोणाचार्यकी सेनाका विनाश कर डालो”
dhanañjayo hi nas tāta garhayed etya saṁyugāt kṣipram astraṁ samādāya droṇānīkaṁ viśātaya
قال سنجيا: «يا عزيزي، إن عدنا من المعركة بلا نصر فإن دهننجايا (أرجونا) سيوبّخنا لا محالة. فاسرع إلى حمل سلاحك وحطّم جيش درونا.»
संजय उवाच